Time to Act on Dr King’s Call to Tackle Evils of Racism, Economic Exploitation, and War – HINDI

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Photo: Dr Martin Luther King, Jr., speaking against the Vietnam War, St. Paul Campus, the University of Minnesota in St. Paul, April 27, 1967. CC BY-SA 2.0. Wikimedia Commons.
Photo: Dr Martin Luther King, Jr., speaking against the Vietnam War, St. Paul Campus, the University of Minnesota in St. Paul, April 27, 1967. CC BY-SA 2.0. Wikimedia Commons.

नस्लवाद, आर्थिक शोषण और युद्ध की बुराइयों से निपटने के लिए डॉ. किंग के आह्वान पर कार्रवाई का समय

एलिस स्लाटर द्वारा एक दृष्टिकोण

न्यूयॉर्क (आईडीएन) – स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंसटीट्यूट (SIPRI) ने अभी-अभी वर्ष 2020 की अपनी इयरबुक जारी की है, जो शस्त्रों, निरस्त्रीकरण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति के बारे में सूचना देती है। शक्ति के भूखे, परमाणु हथियारों से संपन्न प्रभावशाली देशों के बीच बढ़ते वैमनस्य के बारे में आ रही भयावह खबरों की गूँज को देखते हुए, SIPRI हथियारों के नियंत्रण के लिए एक निराशाजनक दृष्टिकोण का वर्णन करता है।

यह इयरबुक किसी जांच या नियंत्रण के बिना परमाणु हथियारों के अविरत आधुनिकीकरण और नए हथियारों के विकास, अंतरिक्ष शस्त्रीकरण में हो रहे विकास, और महान शक्तियों के बीच सहयोग एवं निगरानी के लिए प्रथाओं तथा संभावनाओं में तेजी से गिरावट के साथ-साथ भू-राजनीतिक तनावों में परेशान करने वाली बढ़ोतरी को दर्शाता है।

यह सब कुछ सौ सालों में एक बार होने वाले वैश्विक प्लेग, और नस्लवाद के खिलाफ़ सार्वजनिक विद्रोह के बढ़ते ज्वार की पृष्ठभूमि के विरुद्ध हो रहा है। यह स्पष्ट है कि अफ्रीका से उनकी इच्छा के विरुद्ध जंजीरों में बांधकर इस जमीन पर लाए गए पूर्व में ग़ुलाम रहे लोगों पर पुलिस की बर्बरता के कारण, न केवल नस्लीय अलगाव की हृदयस्थली अमेरिका में, बल्कि पूरी दुनिया में लोग, आंतरिक पुलिस बलों की हिंसक और नस्लवादी चालों का विरोध कर रहे हैं, जिसका मिशन लोगों की रक्षा करना है, उन्हें आतंकित करना, अपंग बना देना और मारना नहीं है!

हम जैसे-जैसे सच बताना शुरू करते हैं और नस्लवाद के नुकसान को समाप्त करने के तरीकों को तलाशते हैं, हमें मार्टिन लूथर किंग के 1967 के भाषण  को याद करना उचित होगा, जिसमें वे एक सहानुभूतिपूर्ण समाज के प्रति असहमति दिखाते हैं, ठीक वैसे ही, जिस तरह आज वैश्विक सक्रियतावादियों के द्वारा स्थापनाओं को “इसे नीचे दबाने” के लिए कहा जा रहा है और अनावश्यक रूप से उकसाने के लिए “पुलिस को बदनाम” करने के लिए नहीं कहा जा रहा है।  

इस बात को स्वीकार करते हुए कि नागरिक अधिकारों के मामले में प्रगति की गई थी, लूथर किंग ने हमें स्थापनाओं की भयाकुलता को कम करने के लिए “तीन प्रमुख बुराइयों- नस्लवाद की बुराई, निर्धनता की बुराई और युद्ध की बुराई” को दूर करने के लिए कहा। उन्होंने उल्लेख किया कि “पृथकतावाद की सम्पूर्ण अट्टालिका की नींव हिलाने” में नागरिक अधिकारों के मामले में जो प्रगति हुई है, वह हमारे लिए “सतही खतरनाक आशावाद में संलग्न होने का कारण” नहीं बनना चाहिए।”

उन्होंने आग्रह किया कि हमें संयुक्त राज्य में 40 मिलियन लोगों के लिए “निर्धनता की बुराई” से भी निपटना होगा, “उनमें से कुछ मैक्सिकन अमेरिकी, भारतीय, प्यूर्टो रिकान्स, एपालाचियन श्वेत… बड़े बहुसंख्यक… नीग्रो” हैं। प्लेग के इस समय में पिछले कुछ महीनों में काल-कवलित हो गए लोगों के डरावने आंकड़ों में अश्वेत, भूरे, और निर्धन लोगों की बेमेल संख्या, स्पष्ट रूप से उस बिंदु का मजबूती से समर्थन करते हैं जिसे लूथर किंग प्रस्तुत कर रहे थे।

अंत में, वे “युद्ध की बुराई” की बात करते हैं जो मानता है कि “किसी म किसी तरह ये तीन बुराइयाँ एक-दूसरे से जुड़ी हैं। नस्लवाद, आर्थिक शोषण और सैन्यवाद जैसी बुराइयों की तिकड़ी दर्शाती है कि “आज मानव जाति के सामने सबसे बड़ी चुनौती युद्ध से छुटकारा पाने की है।”

आज हम जानते हैं कि हमारी दुनिया के अस्तित्व के सामने आज जो सबसे बड़ा खतरा है, वह परमाणु युद्ध या विनाशकारी जलवायु परिवर्तन है। धरती माता हमें समय दे रही है, हम सभी को यह सोचने का अवसर दे रही है कि हम उन तीनों बुराइयों को कैसे दूर कर सकते हैं, जिनके बारे में लूथर किंग ने हमें चेतावनी दी थी।

SIPRI द्वारा रिपोर्ट की गई शस्त्रों की बेलगाम दौड़ को रोकना जरूरी है, उसी तरह से जैसे कि अंतत: हम नस्लवाद को रोक रहे हैं और लूथर किंग द्वारा किए गए आगाज को अंज़ाम तक पहुँचा रहे हैं, जो कानूनी अलगाव को समाप्त करता है, लेकिन भयावह प्रथाएं अभी भी मौजूद हैं जिन्हें अब दूर किया जा रहा है। हमें उन अतिरिक्त बुराइयों को दूर करने की जरूरत है जिनमें आर्थिक शोषण शामिल है और हथियारों की दौड़ के बारे में सच बताना शुरू करना है ताकि हम युद्ध का अंत कर सकें। हथियारों की दौड़ को कौन उकसा रहा है? इसकी रिपोर्टिंग कैसे हो रही है?

भूतपूर्व राजदूत थॉमस ग्राहम द्वारा हाल ही में लिखा गया एक लेख कटाक्ष बनती रिपोर्टिंग का एक उदाहरण है:

संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस प्रतिबद्धता [व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर बातचीत करने] को गंभीरता से लिया। इसने पहले से ही 1992 में परमाणु परीक्षण पर रोक लगा दी थी, ताकि दुनिया के बाकी देश ऐसा करने के लिए प्रेरित हों, और 1993 में शुरू होने वाले परमाणु-हथियार परीक्षणों पर अनिवार्य रूप से अनौपचारिक वैश्विक स्थगन को अपनाया जाए। जिनेवा में संपन्न समझौता सम्मेलन  एक वर्ष की समयसीमा के भीतर सीटीबीटी के लिए सहमति बनी।  

यहाँ राजदूत ग्राहम ने संयुक्त राज्य अमेरिका को गलत तरीके से श्रेय दिया और यह स्वीकार करने में विफल रहे कि यह सोवियत संघ था, संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं था, जिसने पहली बार 1989 में गोर्बाचेव के तहत परमाणु परीक्षण पर रोक लगाई थी, जब कजाख कवि ओलाज़ सुलेमानोव के नेतृत्व में कज़ाकों ने मार्च किया था कजाखस्तान में सेमलिपलाटिंस्क में सोवियत परीक्षण स्थल, भूमिगत परमाणु परीक्षणों का विरोध कर रहा था जो वायुमंडल में प्रवेश कर रहे थे और जिससे वहां रहने वाले लोगों में जन्म दोष, उत्परिवर्तन, कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई थी।

यहाँ राजदूत ग्राहम ने गलती से संयुक्त राज्य अमेरिका को श्रेय दिया और यह स्वीकार करने में विफल रहे कि संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं बल्कि सोवियत संघ था, जिसने पहली बार 1989 में गोर्बाचेव के अधीन परमाणु परीक्षण पर रोक लगाई थी, जब कज़ाख कवि ओलाज़ सुलेमानोव के नेतृत्व में कज़ाकियों ने सेमिपालतिंस्क, कज़ाकिस्तान, में सोवियत परीक्षण स्थल पर मार्च करके भूमिगत परमाणु परीक्षणों का विरोध कर रहे थे, जब इसके कण वायुमंडल में प्रवेश कर रहे थे जिससे वहां रहने वाले लोगों में जन्मजात दोष, उत्परिवर्तन, कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई थी।

सोवियत परीक्षण समाप्ति के जवाब में, कांग्रेस, जिसने यह कहते हुए सोवियत अधिस्थगन को मानने से इंकार कर दिया था कि हम रूसियों पर भरोसा नहीं कर सकते हैं, वह अंततोगत्वा एलएएनएसी के संस्थापक और एनवाईसी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एड्रियन बिल डेविंड के नेतृत्व में लॉयर्स अलायंस फॉर न्यूक्लियर आर्म्स कंट्रोल (LANAC) द्वारा भूकंपविज्ञानियों के एक दल की सेवाएं लेने के लिए निजी तौर पर लाखों डॉलर जुटाने के बाद अमेरिका के अधिस्थगन पर सहमत हो गई और उस दल ने रूस का दौरा किया जिसे सोवियत ने सेमिपालतिंस्क में सोवियत परीक्षण स्थल की निगरानी करने के लिए अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की। सोवियत परीक्षण स्थल पर हमारे भूकंपविज्ञानियों की मौजूदगी से कांग्रेस की आपत्ति समाप्त हो गई।

अधिस्थगन के बाद, 1992 में सीटीबीटी पर बातचीत की गई और क्लिंटन द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन यह कांग्रेस के लिए एक फौस्टियन सौदा बनकर आया, जिसमें उसे “स्टॉकपाइल स्टीवर्डशिप” के लिए हर वर्ष छह बिलियन डॉलर से अधिक आय वाली शस्त्र प्रयोगशालाएं देनी पड़ी, जिसमें कंप्यूटर द्वारा परमाणु परीक्षण और कम-महत्वपूर्ण परीक्षण शामिल थे, जहां अमेरिका नेवादा परीक्षण स्थल पर पश्चिमी शोसोन की पवित्र भूमि पर रेगिस्तान की सतह से 1,000 फीट नीचे उच्च विस्फोटक के साथ प्लूटोनियम का विस्फोट कर रहा था।

चूंकि उन परीक्षणों से श्रृंखलित अभिक्रिया नहीं हुई थी, इसलिए क्लिंटन ने कहा कि यह परमाणु परीक्षण नहीं था! 2020 पर तेजी से आगे बढ़ते हुए, जहां परमाणु परीक्षणों पर नहीं बल्कि “विस्फोटक” परमाणु परीक्षणों प्रतिबंध का वर्णन करने के लिए शस्त्र “नियंत्रण” समुदाय द्वारा अब भाषा की बाजीगरी की जा रही है, जैसे कई कम-महत्वपूर्ण परीक्षण जहां हम रसायनों के साथ प्लूटोनियम उड़ा रहे हैं, वह “विस्फोटक” नहीं हैं।

बेशक, रूसियों ने ज़ेम्ल्या में अपने खुद के कम-महत्वपूर्ण परीक्षण करके, दूसरों की कार्रवाईयों का पालन किया, जैसा कि वे हमेशा करते है! और इस उन्नत परीक्षण और प्रयोगशाला प्रयोग कार्य को ही भारत ने सीटीबीटी का समर्थन नहीं करने और इस संधि पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही महीनों के भीतर परीक्षण अधिस्थगन से बाहर होने का कारण बताया, इसके बाद तुरंत पाकिस्तान ने यही रूख़ अपनाया जो परमाणु हथियारों को तैयार करने तथा उनका परीक्षण करना जारी रखने की प्रौद्योगिकी की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता था। और इस तरह, यह रवैया चला और बढ़ता गया! और SIPRI के आँकड़े भयावह होते गए!

अमेरिका-रूस संबंधों और परमाणु हथियारों की दौड़ में अमेरिका की जटिलता के बारे में सच बताने का समय आ गया है यदि हम इसे वाकई कभी बदलने के साथ-साथ दुनिया में हथियार बनाने की दौड़ को खत्म करना चाहते हैं। शायद, बुराइयों की तिकड़ी को खत्म करके, हम युद्ध के अभिशाप का अंत करने के लूथर किंग के सपने को पूरा कर सकते हैं और संयुक्त राष्ट्र द्वारा परिकल्पित मिशन को पूरा कर सकते हैं! कम से कम, हमें वैश्विक युद्ध विराम के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के आह्वान को प्रोत्साहित करना चाहिए, जब तक हमारी दुनिया धरती माता पर ध्यान देती है और इस जानलेवा प्लेग को दूर करती है। [IDN-InDepthNews – 15 जून 2020]

चित्र: वियतनाम युद्ध के खिलाफ़ बोलते हुए डॉ. मार्टीन लूथर किंग, जूनियर, सैंट पॉल कैंपस, यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा, सैंट पॉल, 27 अप्रैल 1967. CC BY-SA 2.0. विकिमीडिया कॉमन्स।